
छत्तीसगढ़ में सड़क विकास का महाअभियान तेज: पीएमजीएसवाई फेस-4 के तहत हर बिना सड़क वाली बसाहट तक पहुंचेगा पक्का संपर्क मार्ग, मुख्य सचिव ने दिए कड़े निर्देश
रायपुर:- छत्तीसगढ़ में ग्रामीण सड़क नेटवर्क को मजबूत करने और अंतिम छोर तक विकास पहुंचाने के लिए सरकार ने बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। राजधानी रायपुर स्थित मंत्रालय (महानदी भवन) में आयोजित प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) की राज्य स्तरीय स्थायी समिति की 28वीं बैठक में मुख्य सचिव विकासशील ने स्पष्ट और सख्त निर्देश देते हुए कहा कि अब प्रदेश की कोई भी बसाहट सड़क सुविधा से वंचित नहीं रहनी चाहिए।

मुख्य सचिव ने पीएमजीएसवाई फेस-4 के तहत राज्य की उन सभी बसाहटों की पहचान करने के निर्देश दिए हैं, जहां अब तक पक्की सड़कें नहीं पहुंची हैं, और उन्हें मुख्य सड़क नेटवर्क से जोड़ने के लिए एक विस्तृत, समयबद्ध और प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने को कहा है। उन्होंने साफ कहा कि यह केवल निर्माण योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन को बदलने वाला मिशन है, जिसे किसी भी हाल में धीमी गति से नहीं चलने दिया जाएगा।
बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि अब सड़क निर्माण कार्य बिना पूरी तैयारी के शुरू नहीं होगा। हर परियोजना से पहले अनिवार्य रूप से ग्राउंड सर्वे किया जाएगा, भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पहले ही पूरी करनी होगी और वन विभाग की अनुमति (फॉरेस्ट क्लीयरेंस) भी निर्माण से पहले अनिवार्य रूप से प्राप्त करनी होगी। अधिकारियों को चेतावनी दी गई कि अधूरी फाइलों या अपूर्ण तैयारी के आधार पर कोई भी कार्य स्वीकृत नहीं होगा।

मुख्य सचिव ने प्रशासनिक लापरवाही और देरी पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि अब कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव जरूरी है। सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करना होगा ताकि परियोजनाएं समय पर पूरी हों और ग्रामीण क्षेत्रों को वास्तविक लाभ मिल सके। किसी भी स्तर पर अनावश्यक देरी या फाइल रोकने की प्रवृत्ति अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सड़क निर्माण में गुणवत्ता को लेकर भी सख्त निर्देश जारी किए गए। मुख्य सचिव ने स्पष्ट कहा कि ग्रामीण सड़कें केवल बनाई नहीं जानी चाहिए, बल्कि मजबूत, टिकाऊ और लंबे समय तक उपयोग योग्य होनी चाहिए। इसके लिए नियमित फील्ड निरीक्षण, तकनीकी गुणवत्ता जांच और सख्त निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं।

बैठक में यह भी सामने आया कि जल जीवन मिशन के तहत पाइपलाइन बिछाने के दौरान कई ग्रामीण सड़कों को नुकसान पहुंचा है। इस पर मुख्य सचिव ने नाराजगी जताते हुए निर्देश दिया कि ऐसी सभी क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत और पुनर्निर्माण कार्य को प्राथमिकता के आधार पर तुरंत पूरा किया जाए, ताकि ग्रामीण आवागमन बाधित न हो।
राज्य के नक्सल प्रभावित क्षेत्र बस्तर संभाग में भी सड़क निर्माण ने बड़ी उपलब्धि दर्ज की है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार पीएमजीएसवाई फेस-1, 2 और 3 के तहत अब तक 8,358 सड़कें और लगभग 447 पुल-पुलिया बनाए जा चुके हैं। वर्ष 2025-26 में सुरक्षा बलों के सहयोग से 52 लंबित सड़क परियोजनाएं पूरी की गईं, वहीं फेस-3 के अंतर्गत 31 बड़े पुलों का निर्माण भी सफलतापूर्वक संपन्न हुआ है।
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के फेस-4 को लेकर सरकार का लक्ष्य स्पष्ट है कि अब राज्य की कोई भी बसाहट सड़क संपर्क से वंचित न रहे। इसके तहत अंतिम छोर तक बसे गांवों को मुख्य सड़क नेटवर्क से जोड़ने, स्वास्थ्य, शिक्षा और बाजार तक आसान पहुंच सुनिश्चित करने और लंबे समय से लंबित परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने पर जोर दिया गया है।
मुख्य सचिव ने अंत में सख्त संदेश देते हुए कहा कि ग्रामीण सड़कें विकास की रीढ़ हैं और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही अब स्वीकार नहीं की जाएगी। आने वाले समय में सभी परियोजनाओं की कड़ी निगरानी और प्रदर्शन आधारित समीक्षा की जाएगी, ताकि योजनाओं का लाभ सीधे जनता तक पहुंचे और प्रदेश का ग्रामीण नक्शा पूरी तरह बदल सके।















